फरवरी-मार्च खेती सलाह: गन्ने की बुवाई और गेहूं की देखभाल का सही तरीका किसान भाइयों के लिए जरूरी सलाह: अगली फसल की तैयारी और मशीनों का रखरखाव

  1. फरवरी-मार्च खेती सलाह: गन्ने की बुवाई और गेहूं की देखभाल का सही तरीककिसान भाइयों के लिए जरूरी सलाह: अगली फसल की तैयारी और मशीनों का रखरखा





नमस्ते किसान भाइयों,

फरवरी का महीना खेती के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण होता है। यह वह समय है जब रबी की फसल (जैसे गेहूं) अंतिम चरण में होती है और खरीफ या जायद की फसलों (जैसे गन्ना, सब्जियां) की तैयारी शुरू हो जाती है। आज के इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि इस समय आपको अपनी फसलों और खेतों में किन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।

1. बसंतकालीन गन्ने की बुवाई (Sugarcane Planting)

फरवरी और मार्च का समय 'बसंतकालीन गन्ने' की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।

  • बीज का चयन: बुवाई से पहले उन्नत किस्मों का चयन करें जो आपके क्षेत्र की जलवायु के अनुकूल हों। बीजोपचार (Seed Treatment) जरूर करें ताकि फसल में फफूंदजनित रोग न लगें।

  • ट्रेंच विधि (Trench Method): अगर संभव हो तो ट्रेंच विधि से बुवाई करें। इससे गन्ने की मोटाई अच्छी होती है और साथ में आप सह-फसली खेती (Intercropping) भी कर सकते हैं।

2. गेहूं की फसल की देखभाल (Wheat Crop Care)

इस समय गेहूं की फसल में दाना भरने की प्रक्रिया (Milking Stage) शुरू हो रही है या हो चुकी है।

  • सिंचाई: अगर तापमान अचानक बढ़ रहा है, तो हल्की सिंचाई करें। ध्यान रखें कि हवा चलने पर सिंचाई न करें, वरना फसल गिर सकती है।

  • निगरानी: रतुआ रोग (Yellow Rust) या अन्य कीटों के लिए नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करते रहें।

3. मिट्टी की जांच (Soil Testing) – मुनाफे की चाबी

अगली फसल की बुवाई से पहले अपने खेत की मिट्टी की जांच अवश्य करवाएं।

  • मिट्टी परीक्षण से पता चलता है कि आपके खेत में किस पोषक तत्व की कमी है।

  • इससे आप अंधाधुंध यूरिया-डीएपी डालने से बचेंगे, जिससे आपकी लागत कम होगी और पैदावार बढ़ेगी। सरकार द्वारा सॉयल हेल्थ कार्ड योजना का लाभ उठाएं।

4. कृषि यंत्रों का रखरखाव (Machinery Maintenance)

आने वाले समय में गेहूं की कटाई शुरू होगी। यह सही समय है अपनी मशीनों को तैयार करने का।

  • कंबाइन और रीपर: अगर आपके पास कंबाइन हार्वेस्टर या स्ट्रॉ रीपर है, तो उनकी सर्विसिंग अभी करवा लें। कटर बार, बेल्ट और इंजन की जांच करें ताकि सीजन के समय मशीन ब्रेकडाउन न हो।

  • रोटावेटर/कल्टीवेटर: खेत की तैयारी के लिए रोटावेटर के ब्लेड्स की धार चेक कर लें।

5. पशुपालन सलाह

बदलते मौसम में पशुओं को खुरपका-मुंहपका (FMD) जैसे रोगों से बचाने के लिए टीकाकरण करवाएं। पशुओं को हरा चारा और संतुलित आहार दें ताकि दूध उत्पादन बना रहे।


निष्कर्ष: खेती में सही समय पर लिया गया सही निर्णय ही मुनाफे की गारंटी है। इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप अपनी पैदावार को कई गुना बढ़ा सकते हैं।

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